बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 16 से अधिक गांव आज भी बिजली-सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जहां हजारों ग्रामीण अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं।
बलौदा बाजार। एक ओर देश डिजिटल इंडिया और विकसित भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 16 से अधिक गांव आज भी बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। जंगल के बीच बसे इन गांवों के हजारों ग्रामीण आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं।
सोलर लाइटें भी आधे घंटे से ज्यादा नहीं जलती
दिन ढलते ही इन गांवों में घना अंधेरा छा जाता है। कभी सोलर सिस्टम के जरिए रोशनी की किरण पहुंची थी, लेकिन करीब एक दशक पहले लगाए गए अधिकांश सोलर पैनल अब खराब हो चुके हैं। कुछ स्थानों पर लगी सोलर लाइटें भी महज आधे घंटे तक ही जल पाती हैं। इसके बाद पूरा इलाका अंधेरे के आगोश में समा जाता है।
जीव-जंतु और हिंसक वन्य प्राणियों का रहता है डर
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। स्कूल खुलने वाले हैं, बच्चों के हाथों में किताबें तो हैं, लेकिन पढ़ने के लिए पर्याप्त रोशनी नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि, रात में अंधेरा होने के कारण बच्चे नियमित पढ़ाई नहीं कर पाते, जिससे उनकी शिक्षा और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जंगल से लगे इन गांवों में अंधेरा केवल असुविधा नहीं, बल्कि जान का खतरा भी है। रात के समय विषैले जीव-जंतु और हिंसक वन्य प्राणियों का डर हमेशा बना रहता है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे हर रात भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिताने को विवश हैं।
बरसात में टूट जाता है संपर्क
ग्रामीणों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। गांवों तक पहुंचने वाले सड़क मार्ग भी अत्यंत जर्जर हैं। बरसात के दिनों में कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से लगभग टूट जाता है। ऐसे समय में किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से गंभीर परिस्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं।
ग्रामीण कई बार कर चुके हैं मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि, आसपास के कई गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है, लेकिन बारनवापारा वनांचल के इन गांवों को आज भी इंतजार है। उनका मानना है कि, अंडरग्राउंड केबल बिछाकर बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए ग्रामीण कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी मांग रख चुके हैं।
एक वर्ष बीतने के बाद नहीं दिखी ठोस पहल
ग्रामीणों ने बताया कि, पिछले वर्ष वे कलेक्टर से भी मिले थे। उस दौरान लगभग 95 करोड़ रुपये की लागत से विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्राक्कलन तैयार किए जाने की जानकारी दी गई थी और जल्द समाधान का आश्वासन भी मिला था। हालांकि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
ना जाने गांवों तक कब पहुंचेगी सुविधा
बारनवापारा के इन गांवों के लोगों का सवाल सीधा है- जब आसपास के क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंच सकती है, तो उनके गांव अब तक अंधेरे में क्यों हैं? आखिर कब इन बच्चों के सपनों को रोशनी मिलेगी और कब इन गांवों तक बिजली, सड़क और बुनियादी सुविधाओं का उजाला पहुंचेगा? अब देखना यह होगा कि, वर्षों से अंधेरे और उपेक्षा का दंश झेल रहे इन ग्रामीणों की पुकार शासन-प्रशासन तक कब पहुंचती है और कब इन गांवों की रातें सचमुच रोशन होती हैं।





