बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश और खनिज प्रशासन के मार्गदर्शन में खनिज विभाग की टीम ने विशेष जांच अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों में संलिप्त 9 वाहनों को जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान 5 हाइवा और 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गईं, जिनका उपयोग अवैध रूप से रेत और चूनापत्थर के परिवहन एवं उत्खनन में किया जा रहा था।
6 से 8 जून तक चला विशेष जांच अभियान
खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 जून से 8 जून 2026 तक जिले के सरकंडा, सीपत, करगी, कोटा, पोड़ी, कोनी और मंगला क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य अवैध खनन और खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। जांच के दौरान कई स्थानों पर नियमों का उल्लंघन करते हुए खनिज परिवहन और उत्खनन के मामले सामने आए, जिन पर तत्काल कार्रवाई की गई।
रेत और चूनापत्थर परिवहन करते हाइवा जब्त
विशेष अभियान के दौरान करगी क्षेत्र में अवैध रूप से रेत परिवहन करते एक हाइवा को पकड़ा गया। वहीं कोनी क्षेत्र में चूनापत्थर परिवहन करते एक हाइवा तथा सरकंडा क्षेत्र में चूनापत्थर परिवहन करते दो हाइवा वाहनों को जब्त किया गया। इसके अलावा सीपत क्षेत्र में भी अवैध रेत परिवहन करते एक हाइवा वाहन पर कार्रवाई करते हुए उसे जब्त कर लिया गया।
शिवघाट बैराज में अवैध उत्खनन करते ट्रैक्टर पकड़े गए
खनिज विभाग की टीम ने मंगला क्षेत्र स्थित शिवघाट बैराज में अवैध रूप से रेत उत्खनन करते दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कीं। वहीं पोड़ी क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन में संलग्न दो अन्य ट्रैक्टर-ट्रॉली पर भी कार्रवाई की गई। इस प्रकार अभियान के दौरान कुल 9 वाहनों को जब्त कर कानूनी कार्रवाई की गई। जब्त किए गए सभी वाहनों को संबंधित थाना क्षेत्रों कोनी, कोटा, सरकंडा और सीपत की अभिरक्षा में रखा गया है। विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
अवैध खनन पर जारी रहेगी सख्ती
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिज संपदा के अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम लगातार निगरानी कर रही है और अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भंडारण के मामलों में आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व की हानि रोकने के लिए ऐसे अभियान नियमित रूप से संचालित किए जाएंगे।





