धमतरी। लगातार बारिश और जलभराव के बीच धमतरी जिले में महानदी के किनारे बसे गांवों के लिए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। प्रमुख गंगरेल बांध में करीब 31 टीएमसी पानी का भराव हो चुका है और बांध अपनी कुल क्षमता का 97.40 प्रतिशत भर चुका है। वहीं मुरूमसिल्ली बांध भी 98.61 प्रतिशत तक भर गया है। ऐसे में बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी में जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
निचले इलाकों में प्रशासन की पैनी नजर
गंगरेल बांध से 3 गेटों के जरिए 4670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही महानदी में 3360 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी है। पानी की लगातार निकासी को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के साथ ही जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।
खतरा बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर करें रुख
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि, वे नदी-नालों को पार करने या उनके करीब जाने का जोखिम न उठाएं और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। बांधों में लगातार बढ़ते जलभराव और महानदी में पानी छोड़े जाने के बीच आने वाले समय में जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
सिकासार-सोढुर जलाशय लबालब
जलाशयों में तेजी से पानी पहुंचने के साथ महानदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर भी लगातार ऊपर जा रहा है। राजिम के त्रिवेणी संगम से लेकर नवापारा तक महानदी का फैलाव अब साफ तौर पर नजर आने लगा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी कर लोगों से नदी और जलाशयों के आसपास जाने से बचने की अपील की है।
सिकासार में 84% भराव, 6000 क्यूसेक पानी की आवक
गरियाबंद जिले के सिकासार जलाशय में पानी का भराव 84 फीसदी तक पहुंच चुका है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन के मुताबिक जलाशय में करीब 6000 क्यूसेक पानी लगातार पहुंच रहा है, जबकि करीब 4000 क्यूसेक पानी पैरी नदी में छोड़ा जा रहा है। लगातार आवक बनी रहने से जलाशय के जलस्तर पर विभाग की लगातार निगरानी है।
गंगरेल में 93% से ज्यादा पानी, मुरुमसिल्ली पूरी तरह लबालब
धमतरी जिले के गंगरेल जलाशय में भी पानी तेजी से बढ़ा है। यहां 93.35 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है और करीब 9,844 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। वहीं मुरुमसिल्ली जलाशय 100 प्रतिशत भर चुका है। इसके बावजूद करीब 3,836 क्यूसेक पानी लगातार पहुंच रहा है। जलाशय से सायफन के जरिए पानी गंगरेल की ओर जा रहा है, जिससे आगे जल प्रबंधन को लेकर विभाग की चिंता बढ़ गई है।
दुधावा और सोढुर में भी बढ़ रहा जलस्तर
दुधावा जलाशय में 82.86 प्रतिशत जलभराव हो चुका है और यहां करीब 807 क्यूसेक पानी की आवक जारी है। सोढुर जलाशय में 68.78 प्रतिशत पानी भर चुका है, जबकि करीब 595 क्यूसेक पानी लगातार पहुंच रहा है। लगातार बारिश जारी रहने पर इन जलाशयों का जलस्तर और बढ़ने की संभावना है।
राजिम संगम में महानदी का रौद्र रूप
जलाशयों में बढ़ते पानी का असर राजिम के त्रिवेणी संगम में भी दिखाई दे रहा है। कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर का चबूतरा चारों ओर से पानी से घिरा नजर आ रहा है। महानदी की धार तेज होने के साथ पानी का फैलाव भी काफी बढ़ गया है। राजिम और नवापारा के नदी तटीय हिस्सों में महानदी का पानी दूर तक फैला हुआ दिखाई दे रहा है। नवापारा में पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर के आसपास भी पानी की तेज धार नजर आ रही है।
गंगरेल से पानी छोड़ा गया तो बढ़ सकती है मुश्किल
जलाशयों में लगातार पानी की आवक को देखते हुए गंगरेल जलाशय से महानदी में पानी छोड़ने की स्थिति बन सकती है। यदि ऐसा होता है तो राजिम क्षेत्र में महानदी का जलस्तर और ऊपर जाने की संभावना रहेगी। इसका असर विशेष रूप से संगम क्षेत्र और नदी किनारे बसे निचले इलाकों पर पड़ सकता है। हालांकि राजिम और नवापारा में बने ऊंचे और मजबूत तटबंध फिलहाल शहर के आबादी वाले हिस्सों के लिए सुरक्षा कवच बने हुए हैं।
नदी किनारे बसे गांवों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
शहरी इलाकों की तुलना में नदी किनारे बसे गांवों और निचले क्षेत्रों में खतरा ज्यादा है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में इन इलाकों में पानी घुसने की आशंका बनी रहती है। प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी के पास जाने से बचने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है।
प्रशासन की अपील- नदी किनारे न जाएं
लगातार बारिश और जलाशयों में बढ़ती आवक को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने कहा है। महानदी, पैरी नदी और अन्य जलस्रोतों के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी गई है। फिलहाल बारिश का दौर जारी है और जलाशयों में पानी की आवक भी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले घंटे राजिम क्षेत्र के लिए अहम माने जा रहे हैं। जलस्तर में और बढ़ोतरी होने पर प्रशासन को अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।





