उतई। शासकीय दानवीर तुलाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय उतई में कारगिल विजय दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय सेना के शौर्य अमर बलिदानी हेतु समर्पित अमर शहीदों परमवीर चक्र विजेता और कारगिल के मुख्य हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे और ग्रेनेडीयर योगेंद्र सिंह यादव, कैप्टन सौरभ कालिया, फ्लाइट कैप्टन नचिकेता, ऑफिसर अजय आहूजा, मेजर राजेश, मेजर विवेक गुप्ता, मेजर आचार्य, कर्नल रवींद्रनाथ, कैप्टन विजेंद्र थापा आदि को स्मरण करते हुए उनकी शहादत को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्राएं कैडेट आशु कुमारी और केडेट निकिता ने अमर शहीदों के शहादत पर अपनी बात रखी, एवं अन्य एनसीसी कैडेट्स व सीमा साहू आशु, प्राशु, श्वेता आदि ने चित्रों के माध्यम से अपनी भावनाओं को कागज पर उकेरा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ डीपी कुर्रे ने कहा कि कैप्टन विक्रम बत्रा का कथन “ये दिल मांगे मोर” और कैप्टन मनोज पांडे का यह वक्तव्य कि” यदि भारत माता की रक्षा के पूर्व मृत्यु भी आए तो उसे परास्त कर दूंगा ” वास्तव में भारतीय सेना के अदम्य साहस और सर्वोच्च पराक्रम का परिचय है। राष्ट्र प्रथम की भावनाओं से भरे हुए हमारे अनान्य वीर सैनिकों ने 18000 की ऊंचाइयों में भी बर्फ से ढकी पहाड़ियों के ऊपर तैनात होकर भारत मां की रक्षा के लिए सहर्ष अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया।
इस अवसर पर हवलदार कृष्ण बहादुर सुनार 8 सीजी गर्ल्स बटालियन रायपुर एनसीसी ने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों ने विजय अभियान की गाथा को अपने खून की स्याही से लिखा है साथ ही हवलदार कृष्ण बहादुर सुनार ने कारगिल के तोरोलिंग ,द्रास, कारगिल आदि सेक्टर में अपनी ड्यूटी के और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए अपने अनुभवों को छात्र-छात्राओं से साझा किया।
उन्होंने बताया कि कारगिल विजय के उन स्थलों कारगिल, द्रास सेक्टर, तोरोलिंग, काकेश्वर आदि पर 8 से 9 महिने बर्फ ढके होते हैं माइनस 60 डिग्री तक तापमान पाया जाता है जहां पर सेवा के जवान घातक ,कमांडोज, पेट्रोलिंग, सर्चिंग करते हैं ताकि भारत भूमि को दुश्मनों की बुरी नजरों से सुरक्षित रख पाए। सेना के प्रति सम्मान राष्ट्र के प्रति प्रेम और अपने कर्तव्यों का निर्वहन ही अमर शहीदों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ शुभा शर्मा, डॉ रीता गुप्ता एवं डॉ राकेश मिंज ने छात्राओं द्वारा बनाए हुए कारगिल युद्ध की भावनाओं और उनके संदेशों की जीवंतता को सराहा। कार्यक्रम का संचालन एनसीसी ऑफिसर कैप्टन डॉक्टर अनसूईया जोगी ने किया। और आभार प्रदर्शन एन एस एस अधिकारी प्रोफेसर रितेश नायक ने किया।





