उतई। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा शासकीय प्राथमिक शाला घुघसीडीह में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, तनावमुक्त रहने के उपाय बताना तथा उन्हें अपनी भावनाओं को समझने और खुलकर व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य भी हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वस्थ मन से ही बच्चे पढ़ाई, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने से आत्मविश्वास बढ़ता है तथा बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है।
बच्चों को समझाया गया कि पढ़ाई का दबाव, परीक्षा का डर, दोस्तों के साथ मनमुटाव, परिवार से जुड़ी परेशानियां अथवा किसी बात को लेकर चिंता होना सामान्य बात है। ऐसी परिस्थितियों में अपनी समस्याओं को मन में दबाकर रखने के बजाय माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना चाहिए। समय पर अपनी बात कहने और उचित मार्गदर्शन लेने से कई परेशानियों का समाधान आसानी से किया जा सकता है।
कार्यक्रम में बच्चों को सकारात्मक सोच अपनाने, नियमित दिनचर्या का पालन करने, पर्याप्त नींद लेने, पौष्टिक भोजन करने, खेलकूद में भाग लेने तथा परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उन्हें दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने, अपने सहपाठियों के साथ अच्छा व्यवहार करने और किसी भी बच्चे का मजाक न उड़ाने की सीख दी गई।
मानसिक स्वास्थ्य के साथ विधिक जागरूकता पर भी जोर
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बच्चे को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। बच्चों को अपनी समस्याओं के बारे में बिना किसी डर या झिझक के बड़ों को बताना चाहिए। किसी भी प्रकार की परेशानी, भेदभाव अथवा असुरक्षा महसूस होने पर शिक्षक, अभिभावक या संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से सहायता लेनी चाहिए।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और न ही किसी व्यक्ति को उसकी परेशानी के लिए दोषी ठहराना चाहिए। समय पर सहयोग, संवेदनशील व्यवहार और उचित मार्गदर्शन से बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित यह पहल बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रही। इस प्रकार के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ विकसित होती है और वे अपने जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक आत्मविश्वास के साथ करना सीखते हैं।
इस दौरान प्रधान पाठक श्रीमती बी संध्या, आर बंजारे, स्वयंसेवी शिक्षक श्रीमती उषा जोशी, पैरालीगल वालंटियर्स व स्कूली बच्चे मौजूद रहे।





