महिलाएं सिर्फ अपने बच्चों ही नहीं, बल्कि विद्यालय के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी रखती हैं व्रत – डॉ. गंगा शरण पासी
रायपुर। भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में महिलाओं के अनेक विशेष पर्वों का महत्वपूर्ण स्थान है। इन्हीं प्रमुख पर्वों में से एक हलषष्ठी (हरछठ) का पर्व 2 सितंबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं।
हलषष्ठी पर्व को लेकर नवीन शिक्षक संघ ने महिला शिक्षिकाओं के लिए विशेष अवकाश घोषित किए जाने की मांग की है। संघ के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. गंगा शरण पासी ने कहा कि महिला शिक्षिकाएं केवल अपने स्वयं के बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर जीवन की कामना भी करती हैं, जिन्हें वे प्रतिदिन विद्यालय में शिक्षा प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षिका का दायित्व केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं होता। विद्यालय पहुंचने के बाद वह सैकड़ों बच्चों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षिका बच्चों को ज्ञान, संस्कार और बेहतर भविष्य की दिशा देने का कार्य करती है। ऐसे में हलषष्ठी जैसे विशेष पर्व पर महिला शिक्षिकाओं की धार्मिक आस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग को विशेष अवकाश की घोषणा करनी चाहिए।
डॉ. गंगा शरण पासी ने कहा कि हलषष्ठी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर बिना जल और भोजन के व्रत रखने के बावजूद महिला शिक्षिकाओं को विद्यालय में अपनी नियमित जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। वर्तमान में यदि किसी महिला शिक्षिका को इस पर्व पर अवकाश चाहिए तो उसे आकस्मिक अवकाश (सीएल) का उपयोग करना पड़ता है। जबकि यह पर्व महिलाओं की धार्मिक आस्था और मातृत्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पारंपरिक पर्व है।
उन्होंने कहा कि भारत धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं वाला देश है। देश और विभिन्न राज्यों में अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसरों पर अवकाश घोषित किए जाते हैं, लेकिन महिलाओं के विशेष पर्व हलषष्ठी पर शिक्षा विभाग द्वारा महिला कर्मचारियों और विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं के लिए अवकाश घोषित नहीं किया जाना विचारणीय विषय है।
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता ने शिक्षा विभाग और शासन से मांग की है कि महिला शिक्षिकाओं की धार्मिक भावनाओं और विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हलषष्ठी पर्व पर महिला शिक्षिकाओं के लिए विशेष अवकाश की व्यवस्था की जाए। इससे महिलाएं बिना किसी चिंता के अपने धार्मिक अनुष्ठान और व्रत का पालन कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि महिला शिक्षिकाएं समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक ओर वे अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी संभालती हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यालय में पहुंचकर हजारों बच्चों के भविष्य को संवारने का कार्य करती हैं। इसलिए उनकी धार्मिक आस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों का सम्मान किया जाना आवश्यक है।
नवीन शिक्षक संघ ने शासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि भविष्य में हलषष्ठी जैसे महिलाओं के विशेष धार्मिक पर्वों पर महिला कर्मचारियों एवं शिक्षिकाओं के लिए अवकाश अथवा विशेष सुविधा प्रदान करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।





