सुकमा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाले सुकमा जिले में अब बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच पुलिस कानून-व्यवस्था की नई चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को तैयार कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित पुलिस आरक्षी केंद्र में दंगा नियंत्रण (रायट कंट्रोल) को लेकर व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान पुलिस जवानों ने प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बल, दोनों की भूमिका निभाकर वास्तविक परिस्थितियों का अभ्यास किया।
अभ्यास के दौरान पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी बनकर नारेबाजी की, जुलूस निकाला और भीड़ के उग्र होने जैसी काल्पनिक स्थिति तैयार की। इसके बाद रायट कंट्रोल टीम ने रणनीति के तहत मोर्चा संभालते हुए भीड़ को नियंत्रित करने की कार्रवाई का प्रदर्शन किया। जवानों ने सांकेतिक लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के उपयोग का भी अभ्यास किया।
दंगा नियंत्रण उपकरणों के इस्तेमाल का अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस बल ने रायट गियर, हेलमेट, शील्ड, लाठी, आंसू गैस सहित अन्य दंगा नियंत्रण उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण लिया। जवानों को भीड़ नियंत्रण, न्यूनतम बल प्रयोग, संवेदनशील परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के तरीकों का भी अभ्यास कराया गया।
आपात स्थिति से निपटने की तैयारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बदलते सामाजिक और सुरक्षा हालात को देखते हुए ऐसे अभ्यास बेहद जरूरी हैं। इनका उद्देश्य पुलिस बल की तत्परता, समन्वय, नेतृत्व क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है।
एएसपी ने दी मामले की जानकारी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज तिर्की ने बताया कि बदलते परिवेश को देखते हुए पुलिस बल को और अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से बलवा रोधी दस्ते का मॉक ड्रिल आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नियमित अभ्यास से पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ती है और किसी भी आकस्मिक स्थिति में आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।





