रेल परियोजना के नाम पर किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन – ढालेश साहू
दुर्ग। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की प्रस्तावित खरसिया नया रायपुर परमालकसा रेल परियोजना के विरोध में प्रभावित किसान लामबंद हो गए हैं। जिला प्रशासन और रेलवेअधिकारियों द्वारा खेतों में किए जा रहे भूमि सर्वे और चिन्हांकन की कार्यवाही पर किसानों ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे तानाशाही करार दिया है।
प्रशासनिक आदेश और अवैध सर्वे का आरोप
किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बिना किसी लिखित सहमति, उचित मुआवजा निर्धारण या पुनर्वास योजना के उन पर भूमि चिन्हांकन के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ज्ञात हो कि 20 अगस्त 2025 को जिला प्रशासन द्वारा जारी एक आदेश के तहत ग्राम करगाडीह, पाउवारा, भानपुरी, बिरेझर बोरिगरका, चांदखुरी, चांगोरी, घुघसिडीह और खोपली की कृषि योग्य भूमि की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन और व्यपवर्तन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। किसानों का कहना है कि इस आदेश की आड़ में अब कलेक्टर दुर्ग के अधीनस्थ अधिकारी खेतों में जबरन घुसकर सर्वे करने की कोशिश कर रहे हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें:
लिखित आश्वासन: मुआवजा निर्धारण, भुगतान और पुनर्वास की जानकारी लिखित रूप में दी जाए। स्थायी रोजगार: प्रभावित परिवारों के सदस्यों के लिए रेलवे में स्थायी रोजगार की स्पष्ट नीति बने।
पारदर्शिता: विधिवत अधिसूचना और सहमति तक भूमि पर लगी सभी जैसे (बोरवेल, घर, पेड़, कुआ,बाड़ी) आदि सर्वे कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाएं।
कानूनी प्रक्रिया: पूरी कार्यवाही ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013’ के तहत ही संपन्न हो।
किसान नेता ढालेश साहू का कड़ा रुख:
मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेता ढालेश साहू ने कहा कि बिना किसानों की लिखित सहमति और मुआवजा तय किए सर्वे व चिन्हांकन कराना संविधान के अनुच्छेद 300-A और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का खुला उल्लंघन है। जमीन किसानों की आजीविका है और कानूनन प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह हमारे जीवन एवं आजीविका के अधिकार (अनुच्छेद 21) पर भी हमला है। जब तक प्रशासन हमारी जायज मांगें पूरी नहीं करता, हम एक इंच जमीन भी नहीं देंगे।”
इस मनमानी के खिलाफ आगामी 18 जनवरी को किसान मजदूर अधिकार सभा आयोजित ग्राम चंदखुरी में सामुहिक मजबूत निर्णय लिया जाएगा।
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