जगदलपुर। नक्सलवाद ने छत्तीसगढ़ का बस्तर जिसकी आबो हवा को बदल दिया था। नक्सलवाद ने बस्तर की धरती को कर लहू लुहान दिया था। लेकिन बदले हालात ने अब अब कुछ बदल दिया है। अब बस्तर की मिट्टी में अब बारूद की गंध नहीं, बल्कि आम की खुशबू बिखेर रही है। बस्तर के किसान ने अपनी चार साल की कड़ी मेहनत ने एक ऐसे आम की पैदावार की है। इस आम की कीमत किलो ढाई से तीन लाख रुपये किलो है।
बस्तर के ट्री मैन संपत झा ने हमें बताया कि कुछ वर्ष पहले भारी कीमत चुकाकर मियाजाकी आम का पौधा राजमेन्द्री से अपने बगीचे में लगाया था। उस समय कई लोगों ने इसे महज एक प्रयोग माना था। तीन साल की देखरेख और मेहनत के बाद पौधे में फल आना शुरू हो गया है। इसकी खेती और रखरखाव में विशेष तकनीक और देखभाल की आवश्यकता होती है।
किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत बनेगा यह आम
उन्होंने आगे कहा कि, यह उपलब्धि न केवल बागवानी के क्षेत्र में एक नई शुरुआत है. बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत भी बन सकती है. बस्तर की जलवायु, मिट्टी और पर्याप्त वर्षा मियाजाकी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए अनुकूल साबित हो सकती है। यदि बड़े स्तर पर इसकी खेती सफल होती है तो बस्तर क्षेत्र के किसान पारंपरिक फसलों के साथ ही इस प्रीमियम फल से भी बेहतर आमदनी अर्जित कर सकेंगे।
यह है मियाजाकी आम की खासियत
मियाजाकी आम की उत्पत्ति जापान के मियाजाकी प्रांत में हुई है। तभी से इस आम का नाम मियाजाकी आम पड़ गया। यह आम अपने आकर्षक गहरे लाल रंग, अत्यधिक मिठास और उच्च पोषण मूल्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। फल का वजन सामान्यत 350 से 900 ग्राम तक होता है। मियाजाकी आम में शर्करा की मात्रा सामान्य आमों की तुलना में अधिक होती है, जिससे इसका स्वाद बेहद मीठा होता है। मियाजाकी आम में एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।





