उतई। डुन्डेरा के बजरंग चौक में आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन प संतोष अवस्थी ने वृंदावन लीला, रुक्मणि विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा की अपने कृतार्थ के लिए भगवान से नाता जरूर जोड़ ले। भगवान खतरे में भी भक्ति के मार्ग का प्रशस्त करते रहते है।
उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि पूतना को देखकर भगवान ने अपनी आंखे बंद कर लिया। जितने ऋषि होते है, उतने उनके अलग अलग मत होते है। क्या आप जानते है की मथुराष्टक के रचनाकार कौन है। जिनकी जन्म स्थली छग के चंपारण में है। चंपारण वल्लभाचार्य की जन्म स्थली है। उन्होंने सुबोधनी नामक ग्रंथ की रचना की थी। वल्लभाचार्य जी कृष्ण भगवान व पुतना के विषय में उल्लेखनीय बाते इस ग्रंथ में लिखी थी। आप अपने जीवन का दुरुपयोग न करे। जिंदगी और मौत तो भगवान के हाथ में है।
आज की कथा में पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, नगर पालिक निगम भिलाई के पूर्व सभापति लुमेश्वर चद्राकर, पूर्व एल्डरमैन तरुण बंजारे, कैलाश प्रसाद साहु, खिलावन साहू, भरत लाल साहू, नेन बाई, केदार साहू, मोगरा साहू, स्त्रूघ्न साहू, ललिता साहू, संतोष साहू, केवल कृष्ण, मितू कविता, प्रतिभा, चेतना, उमेश, पियूष, उमेश, जागृति, पुष्कर, जागृति, पूर्णिमा, देवेंद्र चंद्राकर, शनि, देववती, तुलसी, मतराम साहू, सुरेन्द्र साहू, भागवत देवांगन, सावित्री साहु, संतोषी साहु, अनिता साहू, गायत्री साहु, चुम्मन, तुलसी, खुमान साहू, पुरुषोत्तम, लीलाधर साहू सहित सैकड़ों नागरिक सामिल रहे।
कथा रोजाना दोपहर 3 बजे से संध्या 7 बजे तक हो रहा है। 27 अप्रेल की कथा में सुदामा चरित्र, परीक्षत मोक्ष, चढ़ौती
की कथा होगी।





