दुर्ग। धनोरा स्थित बाबा दरबार पावन धाम में 2 मार्च को परंपरागत रूप से होलिका दहन किया जाएगा। यहां हर वर्ष नारियल, नींबू और पुराने कपड़ों से होली जलाई जाती है। बताया जाता है कि इस प्रकार की अनूठी परंपरा पूरे छत्तीसगढ़ में केवल बाबा दरबार धनोरा में ही निभाई जाती है। पिछले 30 वर्षों से परम्परा चली आ रही है।
दरबार के लक्ष्मण बाबा ने बताया कि होलिका दहन के दिन शाम 5 बजे सभी भक्तगण दरबार में एकत्रित होंगे। इसके बाद दुर्ग रोड बोरसी रोड पर स्थित नाले के पास बधुवा की मूर्ति स्थल पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की जाएगी।
श्रद्धालु लाल चुनरी, कपड़ा, पान, मिश्री और नींबू अर्पित कर एक-एक कर बघवा की प्रतिमा के पेट के भीतर से पार होते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी परेशानियां दूर होती हैं। इसके बाद पुनः दरबार पहुंचकर सामूहिक पूजा की जाती है। होली की विधिवत पूजा के बाद नंद पंडा द्वारा चकमक पत्थर की चिंगारी से होलिका दहन किया जाएगा। श्रद्धालु अपने शरीर से नारियल, नींबू और पुराने वस्त्र उतारकर होली में अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
दरबार के लक्ष्मण बाबा ने बताया कि इस होलिका के दिन हर जिले से लोग यहां पर आते हैं फिर गुलाब साहू के मंडली फाग गीत गाया जाता है जिनको सुनकर सब आनंद मे झूमने लगते हैं और नगाड़ा के धुन में मस्त होकर सभी नाचते गाते एक-दूसरे के ऊपर रंग गुलाल लगाकर होली की बधाई देते हैं। दरबार के लक्ष्मण बाबा ने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने दूर-दूर से एवं ग्रामीण आते हैं।





