मिली जानकारी के अनुसार, छात्रावास में प्रदूषित पेयजल की आपूर्ति के चलते दर्जनों छात्राएं बीमार हुईं, जिनमें से कई को हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भी प्रबंधन पर छात्रों के स्वास्थ्य के साथ लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। प्रदर्शन के दौरान कुलपति, रजिस्ट्रार और हॉस्टल अधीक्षक के इस्तीफे की मांग उठाई गई।

छात्राओं को साफ पानी उपलब्ध नहीं

एनएसयूआई के प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल ने कहा कि अब तक करीब 25 छात्राएं पीलिया की चपेट में आ चुकी हैं और छात्राओं को साफ पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी छात्रा की हालत गंभीर होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।