दुर्ग। भारतीय जनता पार्टी की दुर्ग जिला उपाध्यक्ष श्रीमती हर्षा लोकमनी चंद्राकर ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस द्वारा मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाना उनके खुद के भ्रष्ट और विफल शासन से ध्यान भटकाने की साजिश है। सच्चाई यह है कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और फर्जी जॉब कार्ड का पर्याय बन चुकी थी। यशश्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार ने मनरेगा को पारदर्शी, जवाबदेह और मजदूर-हितैषी बनाया। वास्तव में वीबी जी राम जी विकसित भारत के गांवों की कल्पना को साकार करने वाली है। 125 दिनों रोजगार की गारंटी, एक सप्ताह में काम नही मिलने पर बेरोजगारी भत्ता, आधार आधारित भुगतान, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और डिजिटल निगरानी से यह सुनिश्चित किया गया कि मजदूरी सीधे मजदूर के खाते में जाए, न कि कांग्रेस के दलालों की जेब में। कांग्रेस को यह जवाब देना चाहिए कि उनके शासन में मजदूरों को महीनों तक मजदूरी क्यों नहीं मिलती थी? फर्जी जॉब कार्ड कैसे बने? गरीबों के नाम पर पैसा किसने खाया? भाजपा सरकार ने मनरेगा को केवल “खुदाई की योजना” नहीं रहने दिया, बल्कि जल संरक्षण, तालाब निर्माण, सड़क मरम्मत और ग्रामीण संपत्ति निर्माण से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।
श्रीमती चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस आज जब सत्ता से बाहर है तो झूठ और भ्रम फैलाने में लगी है, लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता सब जानती है। जनता अब नारे नहीं, काम करने वाली सरकार चाहती है और यही कारण है कि भरोसा भाजपा पर है।
कांग्रेस को चाहिए कि वह झूठे आरोप लगाने के बजाय अपने 5 साल के कुशासन और भ्रष्टाचार पर जवाब दे।
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